हिंदी मीडियम मूवी रिव्यु | Hindi Medium Movie Review in Hindi | Bucklol

हिंदी मीडियम मूवी रिव्यु | Hindi Medium Movie Review in Hindi

Movie Review : Hindi Medium

Hindi Medium Movie Review in Hindi

Starring : Irfan Khan (Raz), Saba Qamar (Meeta), Deepak Dobriyal(Shyam)

Directed by  : Saket Chaudhary

Produced by  : Bhushan Kumar
Krishan Kumar
Dinesh Vijan

Screenplay by  : Zeenat Lakhani
Saket Chaudhary

गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा है,
इनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा है,
चेहरे कई बेनकाब हो जायेंगे,
ऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा है।

गजब की मिठास है , गरीब के खून में

जिसे भी मौका मिल जाए, पीता जरूर है!

Hindi medium movie review in hindi

अब बात चली है हिंदी मीडियम (Hindi Medium) की तो मेरे दिमाग में ऊपर की कुछ लाइन्स अचानक से दिमाग में आ गयी! वैसे तो फिल्म में आधुनिक जगत की शिक्षा प्रणाली को बहुत ही सुन्दर से ढंग से परोसा गया है पर वही दूसरी और आज के जमाने में लोग कैसे शिक्षा को अपना धंधा बना लेते है और कैसे गरीबो को अपने बच्चो की शिक्षा के लिए मेहनत और जतन करता है पर भी उसकी मेहनत और लगन को कैसे अमीर और रहीस लोग अपने स्वार्थ के लिए दरकिनार कर देते है , उनका हक़ छीन लेते है और अपने रुतबे का इस्तेमाल करते है! भारत की इस सच्चाई को बड़े ही मज़ेदार और धांसू तरीके से फिल्म में परोसा गया है.

जब एक अच्छी कहानी हो और कहानी को निभाने वाले पात्र कोई और नहीं बल्कि इरफ़ान खान हो तो फिर  कहानी में चार चाँद न लगे ऐसा तो हो ही नहीं सकता. साथ ही नयी पाकिस्तानी अदाकारा सबा कमर का किरदार और उनका काम भी काबिले तारीफ़ है.

इरफ़ान खान जिनका इस फ्लिम  में नाम राज़ है  बड़े बिज़नेस मैन, जो की दिल्ली के चांदनी चौक में लहंगे और साडी के अच्छे शोरूम के मालिक है. उनका धंधा भी मस्त से मस्त चल रहा है और उन्हें चांदनी चौक का बिज़नेस टाइकून मना जाता है! पर अब जो लड़का चांदनी चौक की गलियों में पला बढ़ा हो और एक सरकारी स्कूल से पढ़ाई की हो तो आप समझ ही सकते है की बंदा को बन्दा सिर्फ देसी ही नहीं , बड़ा वाला देसी होगा जिसे आज के जामने की तरह  चुतियो की तरह शो ऑफ करने का कोई शौक नहीं. वो तो बस अपनी ज़िन्दगी में मस्त है ! पैसा है , गाडी है, बँगला है , एक मस्त बीवी है तो बस और क्या चाहिए ! पर वही राज़ की बीवी मीता एक सभ्य और रहीसो की तरह रहना पसंद करती है, अमीरो की तरह अंग्रेजी बोलना उसे पसंद है! दोनों की एक बच्ची है! राज़ को तो अपनी बच्ची के साथ मस्ती करना पसंद है, उसे अपनी बच्ची के साथ तारे गईं गईं याद गाने पर झूमना , और जैसे बरात में दूल्हे के जीजा कोट उतार क्र नाचते है वैसे ही उसे भी नाचना पसंद है पर वही मीता को उसकी शिक्षा को लेकर काफी चिंता है. वो समाज के चलन को लेकर काफी परेशां रहती है. वो अपनी बेटी को दिल्ली के सबसे अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाना चाहती है जिसे उसकी बेटी और अमीर घर के बच्चो की तरह अंग्रेजी में बोल सके क्युकी उसे पता है की अगर उसकी बच्ची और अमीर बच्चो की तरह अंग्रेजी में बात न कर पायी तो अमीर समाज उसे स्वीकार नहीं करेगा और उसकी खीली उड़ाएगा इसलिए दोनों माता पिता अपनने बच्ची को दिल्ली के टॉप के स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए काफी पापड़ बेलते है  पर दिल्ली में अपने बच्चे का किसी अच्छे स्कूल में दाखिला करना लोहे के चने चबाने जितना मुश्किल है. उन्ही सब जद्दोजहद और जुगाड़ से शिक्षा को खरीदने की कहानी है हिंदी मीडियम (Hindi Medium).

माता पिता का अपने बच्चे की शिक्षा के लिए किया गए संघर्ष की कहानी! राज़ और मीता का अपनी बच्ची को मॉडर्न लोगो की तरह बनाने के लिए किये गए जतन की कहानी. एक गरीब के प्रेम, त्याग और उसके बड़े दिल को प्रदर्शित करने की कहानी है हिंदी मीडियम.

फिल्म में गरीब आदमी और राज़ के दोस्त का किरदार किया है दीपक डोबरियाल ने, अरे वही अपने पप्पी भैया , तनु वेड्स मनु वाले ! अब उनकी अदाकारी के क्या कहने वो तो आप सब देख ही चुके है और जब दो ऐसे कलाकार एक ही फिल्म में दोस्त का किरदार निभाए तो फिल्म के तो क्या कहने.. फिल्म में तो बस देसी घी और हींग का तड़का लग जाता है!

इरफ़ान खान के तो क्या कहने, बन्दे को नाटक करना तो आता ही नहीं .. बिलकुल घुस ही जाते है किरदार में. बस यही इन्होने यहाँ भी किया हुआ है! और सही भी है ऐसे थोड़े ही बन्दे ने हॉलीवुड में भी कदम जमा लिया था, कोई तो बात थी ही बन्दे में !

अब बात की जाए फिल्म की तो कहानी तो मस्त है ही पर जहाँ बात आती है फिल्म के डायलॉग की तो अमितोष नागपाल ने तो शब्दों का ऐसा मेल जोड़ा है जो दर्शको को पेट पकड़ क्र हसने पर मजबूर कर देगी! समाज के एक सोशल इश्यू को इरफ़ान खान ने और हमारे पप्पी भैया ने बहुत मज़ेदार तरीके से  और मज़े दार डायलॉग के साथ चिपकाया है!

फिल्म  के एक भाग में ऐसा समय भी आता है जहाँ ज्यादा भावुक लोगो की आखें नम भी हो सकती है और बात भी दिल को छूने वाली है जो राज़ और मीता आपस में करते है! जहाँ राज़ को एहसास होता है की उसने अपने स्वार्थ के लिए किसी गरीब का हक़ उससे छीन लिया. और वहीँ मीता को अपने बच्चे की शिक्षा के लिए गलत और सही का भेद नहीं दिखता है! यही पर आपको दीपक डोरियल का दिल को छु जाने वाला डायलॉग  सुनने  को मिलेगा. फिल्म के दो भाग में आपको गाली के दो शब्द भी सुनने को मिल सकते है पर उन शब्दों में गन्दगी नहीं बल्कि यह शब्द फिल्म की जरुरत थे !

तो कुल मिलकर यह फिल्म आपको हाई सोसाइटी के ढकोसलेपन को समझाती है की कैसे यह हाई सोसाइटी हमें दिमागी तौर पर प्रेसराईस करती है, अंग्रेजी बोलने का प्रेसर, अमीर दिखने का प्रेसर, बच्चो की शिक्षा और भविष्य और भी बहुत कुछ. मतलब कुल मिलाकर कॉमन इंसान की ज़िन्दगी झंड हो जाती है इन सब में  .

अंत में बस यही कहूंगा की मूवी बहुत ही मस्त है और अगर आप इसे देखने को सोच रहे है तो एक नंबर पैसा वसूल पिक्चर है!

धन्यवाद!

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